प्रश्न: क्या सत्य का स्वाद कडवा और झुठ का मीठा है?
उत्तर: नही. होता तो झुठ हि कडवा है लेकिन कडवी चीज बाजार में चले कैसे, सो तुम झुठ को मीठे में घोलकर परोसते रहते हो और दुसरे का परोसा खाते रहते हो. ये दुनिया कि रीत है. तुम बेहोश हो, तुम्हे उस मीठे घोल कि आदत पड जाती है. इसलिये जब सत्य से सामना होता है तो तुम्हे वो कडवा प्रतीत होता है. होश में आओगे ये भेद जान पाओगे.
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प्रश्न: अहंकार क्या है?
उत्तर: षडरिपु का मुल है अहंकार. अहंकार(ego) गिर गया तो कामना(desire) गिर गयी और साथ हि कर्ता(doer-self) का भाव. कर्ता का भाव गिरते हि मद(arrogance) न रहा. क्रोध(anger) तभी आता है जब कोई आपकी कामना पुर्ती में बाधा डालता है. कामना गिर गयी तो ना पुर्ती का लोभ(greed) रहा और ना जो पाया उसके प्रती मोह(attachment). लोभ और मोह नही तो मत्सर(jealousy) न रहा. तो शुकर कि बात यह है के ईलाज एक हि बीमारी का करना है.
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